अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग तारों का कार्य
मूलभूत प्रकार्य
ऊर्जा केंद्रित करना:अल्ट्रासोनिक रेखाएं प्लास्टिक के पुर्जों की संपर्क सतह पर बनी छोटी, उभरी हुई रेखाएं होती हैं। ये बिखरी हुई अल्ट्रासोनिक कंपन ऊर्जा को अपने ऊपर केंद्रित करती हैं, जिससे तेजी से उच्च तापमान उत्पन्न होता है।
पिघलने पर नियंत्रण: उच्च तापमान के कारण सबसे पहले अल्ट्रासोनिक रेखाएं पिघल जाती हैं। पिघला हुआ प्लास्टिक संपर्क सतह पर मौजूद अंतरालों को भर देता है, जिससे अतिरिक्त पिघले हुए पदार्थ को बाहर निकलने से रोका जा सकता है और एक चिकनी वेल्ड सतह सुनिश्चित होती है।
बेहतर सीलिंग: पिघला हुआ प्लास्टिक दबाव में पूरी तरह से जुड़ जाता है, जिससे एक गैपलेस कनेक्शन बनता है और वेल्ड की जलरोधी और गैसरोधी सीलिंग क्षमता में सुधार होता है।
प्रमुख डिजाइन संबंधी विचार:
आयाम: आमतौर पर 0.2-0.5 मिमी चौड़ा और 0.1-0.3 मिमी ऊंचा होता है, लेकिन प्लास्टिक सामग्री की कठोरता के आधार पर समायोजन की आवश्यकता हो सकती है।
स्थान: वेल्डिंग सतह पर तनाव बिंदुओं या महत्वपूर्ण सीलिंग क्षेत्रों के अनुरूप होना चाहिए ताकि बल और ऊर्जा का समान हस्तांतरण सुनिश्चित हो सके।




















